आखिर क्या है सृष्टि के पहले दिन का सच?

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सृष्टि का आरंभ कब हुआ इसे लेकर दुनिया भर में अलग-अलग मत हैं। पश्चिमी देशों में दुनिया के शुरू होने की ऐसी निश्चित तिथि नहीं है। ईसाई धर्म में मान्यता है कि ईश्वर ने जब दुनिया की रचना शुरू की तो वह छह दिनों तक इस काम में लगा रहा। शुरूआत के चार दिनों में ईश्वर ने धरती, आकाश, समुद्र और वनस्पतियों का निर्माण किया। पांचवें दिन पक्षियों और मछलियों को बनाया। छठे दिन पशुओं और मनुष्य का निर्माण किया। सातवां दिन विश्राम के लिए निर्धारित किया गया।

वहीं हिन्दू धर्म ग्रंथ और पुराण सृष्टि निर्माण के विकासवाद के सिद्धांत को स्वीकार करता हैं लेकिन इनकी अपनी मान्यता है।  इनके अनुसार भगवान ने सृष्टि की रचना के क्रम में सबसे पहला अवतार मछली के रूप में लिया जो मत्स्य अवतार के नाम से जाना जाता है। इसके बाद कूर्मावतार लिया इसके बाद वराह अवतार हुआ जिसमें भगवान ने धरती को स्थापित किया। इसके बाद पृथ्वी पर मनुष्य और पशु का आगमन हुआ जो नरसिंह अवतार में दर्शाया गया है।

सृष्टि निर्माण की प्रक्रिया के साथ हिन्दू धर्म में सृष्टि निर्माण की एक निश्चित तिथि का भी उल्लेख किया गया है। शास्त्र और पुराण कहते हैं कि ब्रह्मा जी ने चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी पहली तारीख को सृष्टि रचना का कार्य शुरू किया।  यही कारण है कि हिन्दू पंचांग में इस तिथि को साल का पहला दिन माना गया है। परमेश्वर द्वारा सृष्टि रचना के लिए इस तिथि को चुना गया इसलिए इसे सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

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काल गणना के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि दुनिया की शुरूआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हुई थी।  दिलचस्प बात यह है कि अंग्रेजी कैलेंडर द्वारा अब हम भले ही 1 जनवरी को नया साल मनाते हों लेकिन 1752 ई. तक अंग्रेज भी मार्च महीने में ही नववर्ष मनाते थे। चैत्र मास मार्च और अप्रैल के बीच में आता है। यह इस बात का संकेत है कि प्राचीन अंग्रेजी कैलेन्डर भी चैत्र मास में दुनिया की शुरूआत की बात स्वीकार करता रहा होगा।

- राकेश

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