गिर वन में दो और शेरों की मौत से मची अफरा-तफरी

गिर वन में दो और शेरों की मौत से मची अफरा-तफरी
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गिर वन में दो और शेरों की मौत, 13 दिन में 13 मौत से मची अफरा-तफरी

मौत के कारणों का पता लगाने के लिए की जा रही है जांच

दो मानसून सत्र के दौरान औसतन 32 शेरों की मौत

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अमरेली. दुनिया में एशियाई शेरों के एकमात्र निवास गुजरात के गिर वन के एक हिस्से में इसी माह आठ दिन के भीतर 11 शेरों की मौत से मची अफरातफरी के बीच पिछले 24 घंटे में दो और शेरों की उसी इलाके में मौत हो गई है।

क्या कहते हैं प्रधान मुख्य वन संरक्षक: राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ए सक्सेना ने सोमवार को बताया कि अमरेली जिले के धारी में गिर वन के पूर्वी हिस्से के दलखानिया रेंज से, जहां गत 12 से 19 सितंबर के बीच दो नर, तीन मादा और छह शावक शेरों की मौत हुई थी, में वनकर्मियों ने तीन से चार साल की एक और शेरनी को बीमार अवस्था में देखा और इलाज मुहैया कराने से पहले ही इसकी मौत हो गई। इसी क्षेत्र में रविवार को पांच से छह माह के एक शेर शावक को भी बीमार हालत में पाकर उसे जसाधार पशु इलाज केंद्र में भर्ती कराया गया था पर आज उसने दम तोड़ दिया।

64 टीमें तैनात: दाेनों ही मामलों में मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। मृत शेरनी के शरीर पर वन विभाग का एक चिप मिली है, जिससे पता चला है कि यह गत सितंबर माह में भी बीमार थी। 64 टीमें शेरों की तलाश और निगरानी में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि रविवार से ही पूरे गिर वन क्षेत्र में वन विभाग की 64 टीमें एहतियात के तौर पर शेरों की तलाश और उनकी निगरानी में लगाई गई हैं। इनमें से आठ टीमे दलखाणिया में लगाई गई हैं। वन विभाग ने अधिकतर मौतों के लिए इस क्षेत्र में नये शेरों के प्रवेश के चलते होने वाली वर्चस्व की लड़ाई को कारण बताया है।

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अब तक 31 शेरों की मौत: राज्य के गिर सोमनाथ, जूनागढ़ और अमरेली जिलों में 1400 किमी क्षेत्र में फैले जंगल मे 2015 की अंतिम सिंह गणना के अनुसार कुल 523 शेर थे। सक्सेना ने बताया कि पिछले दो मानसून सत्र के दौरान औसतन 32 शेरों की मौत हुई थी और इस साल अब तक 31 शेरों की मौत हुई है।  

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Two more lions die in Gir forest 13 deaths in 13 days
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