• दिल्ली पुलिस ने किया राजेश भारती का एनकाउंटर

    दिल्ली पुलिस ने किया राजेश भारती का एनकाउंटर

    दिल्ली के छतरपुर इलाके में जारी पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मोस्ट वांटेड गैंगस्टर राजेश भारती समेत 4 बदमाशों को ढेर कर दिया है। वहीं इस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के 6 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं। मुठभेड़ को स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव लीड कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार कुछ और बदमाश भी इस एनकाउंटर में ढेर हुए हैं, लेकिन अभी तक उनकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है।

  • दिल्ली पुलिस ने किया राजेश भारती का एनकाउंटर

    दिल्ली पुलिस ने किया राजेश भारती का एनकाउंटर

    दिल्ली के छतरपुर इलाके में जारी पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मोस्ट वांटेड गैंगस्टर राजेश भारती समेत 4 बदमाशों को ढेर कर दिया है। वहीं इस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के 6 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं। मुठभेड़ को स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव लीड कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार कुछ और बदमाश भी इस एनकाउंटर में ढेर हुए हैं, लेकिन अभी तक उनकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है।

  • केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाए जाने संबंधी कॉलेजियम की सिफारिश को वापस भेज दिया है। विधि मंत्रालय के सूत्रों ने आज यहां बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर एक बार फिर से विचार करने को कहा है।

  • केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाए जाने संबंधी कॉलेजियम की सिफारिश को वापस भेज दिया है। विधि मंत्रालय के सूत्रों ने आज यहां बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर एक बार फिर से विचार करने को कहा है।

  • केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाए जाने संबंधी कॉलेजियम की सिफारिश को वापस भेज दिया है। विधि मंत्रालय के सूत्रों ने आज यहां बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर एक बार फिर से विचार करने को कहा है।

  • केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाए जाने संबंधी कॉलेजियम की सिफारिश को वापस भेज दिया है। विधि मंत्रालय के सूत्रों ने आज यहां बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर एक बार फिर से विचार करने को कहा है।

  • केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र का जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने से फिर इंकार

    केंद्र सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के.एम. जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाए जाने संबंधी कॉलेजियम की सिफारिश को वापस भेज दिया है। विधि मंत्रालय के सूत्रों ने आज यहां बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर एक बार फिर से विचार करने को कहा है।

  • अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद हो जाएगी: SC

    अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद हो जाएगी: SC

    नई दिल्ली आधार स्कीम को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद पड़ जाएगी। अदालतों को तकनीकी विशेषज्ञता के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। सरकार ने आधार की वैधता पर विचार कर रही प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच जजों की संविधान पीठ से कहा है कि आधार स्कीम को विशेषज्ञों ने मंजूरी दी है। यह नीतिगत फैसला है इसलिए इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं होनी चाहिए। 2016 का यह कानून डिजिटल युग में मनी लांड्रिंग रोकने, सबसिडी और लाभ पहुंचाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एके सिकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण से कहा कि अदालत का दायित्व बस इतना ही है कि वह कानून की न्यायिक व्याख्या करे।

  • अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद हो जाएगी: SC

    अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद हो जाएगी: SC

    नई दिल्ली आधार स्कीम को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद पड़ जाएगी। अदालतों को तकनीकी विशेषज्ञता के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। सरकार ने आधार की वैधता पर विचार कर रही प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच जजों की संविधान पीठ से कहा है कि आधार स्कीम को विशेषज्ञों ने मंजूरी दी है। यह नीतिगत फैसला है इसलिए इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं होनी चाहिए। 2016 का यह कानून डिजिटल युग में मनी लांड्रिंग रोकने, सबसिडी और लाभ पहुंचाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एके सिकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण से कहा कि अदालत का दायित्व बस इतना ही है कि वह कानून की न्यायिक व्याख्या करे।

  • अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद हो जाएगी: SC

    अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद हो जाएगी: SC

    नई दिल्ली आधार स्कीम को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अगर सरकार के हर काम की न्यायिक समीक्षा होगी तो विकास की गति मंद पड़ जाएगी। अदालतों को तकनीकी विशेषज्ञता के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। सरकार ने आधार की वैधता पर विचार कर रही प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच जजों की संविधान पीठ से कहा है कि आधार स्कीम को विशेषज्ञों ने मंजूरी दी है। यह नीतिगत फैसला है इसलिए इसकी न्यायिक समीक्षा नहीं होनी चाहिए। 2016 का यह कानून डिजिटल युग में मनी लांड्रिंग रोकने, सबसिडी और लाभ पहुंचाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने संविधान पीठ में शामिल जस्टिस एके सिकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण से कहा कि अदालत का दायित्व बस इतना ही है कि वह कानून की न्यायिक व्याख्या करे।

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