स्मृति बोलीं- महिलाएं जब गन्दा पैड लेकर दोस्त के घर नहीं जातीं तो भगवान के घर कैसे जा सकती हैं

स्मृति बोलीं- महिलाएं जब गन्दा पैड लेकर दोस्त के घर नहीं जातीं तो भगवान के घर कैसे जा सकती हैं
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए सभी उम्र की महिलाएं प्रवेश नहीं कर पाईं, वहीं कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन का दौर जारी है. इस बीच, केंद्रीय मंत्री स्मृती ईरानी ने इस मामले पर अपनी राय जाहिर करते हुए तर्क दिया है कि अगल रजस्वला अवस्था में महिलाएं जब खून से सना पैड लेकर दोस्त के घर नहीं जातीं तो भगवान के घर कैसे जा सकती हैं.

 

दरअसल, एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, 'पूजा करना मेरा अधिकार है, लेकिन अपवित्र करना नहीं. एक कैबिनेट मंत्री होने के नाते सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नहीं बोल सकती. क्या आप खून से सने सैनिटरी पैड को लेकर अपने दोस्त के घर जाएंगी? तो आप उसे भगवान के घर में क्यों ले जाएंगे.'

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हालांकि जब सोशन मीडिया पर केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर सवाल उठने लगे तब स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर लिखा कि ये फेक न्यज है और वो जल्द ही इसका वीडियो पोस्ट करेंगी.

गौरतलब है कि सप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 से 50 वर्ष (रजस्वला आयु वर्ग) आयु की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंद हटाए जाने के बाद सबरीमाला मंदिर के कपाट सभी महिलाओं के लिए खोल दिए गए थे. जिसे सोमवार रात बंद कर दिया गया. हालांकि, मंदिर के गर्भगृह तक रजस्वला महिलाओं को प्रवेश नहीं कराया जा सका.

 

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सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने के दिन से विभिन्न हिंदुवादी संगठन परंपरा पर हमला बता कर प्रदर्शन करते रहें. इस दौरान 10-50 आयुवर्ग की महिलाओं ने मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने का प्रयास भी किया. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इन्हें रोक दिया. इस दौरान हिंसक झड़पें भी हुईं.

 

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह केरल के सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अब सुनवाई 13 नवंबर को करेगा!

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