3 idiots के आमिर के जैसे MBBS के स्टूडेंट ने Whatsapp के जरिये ट्रेन में कराई महिला की डिलीवरी

3 idiots के आमिर के जैसे MBBS के स्टूडेंट ने Whatsapp के जरिये ट्रेन में कराई महिला की डिलीवरी
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अजब-गज़ब:  हमारे समाज एक डॉक्टर को लोग भगवान की तरह मानते हैं, क्यूंकि वो जान बचाता है। इसी मान्यता को सही साबित करते हुए MBBS फ़ाइनल ईयर के एक स्टूडेंट ने चलती ट्रेन में एक महिला की डिलीवरी में करवाई. डिलीवरी के दौरान वो पूरे टाइम अपने सीनियर्स के साथ Whatsapp से जुड़ा रहा और उनके द्वारा मिल रहे निर्देशों के आधार पर महिला की डिलीवरी कराई.

ये वाकया अहमदाबाद-पुरी एक्सप्रेस में हुआ. इस ट्रेन में सफर कर रहे 24 वर्षीय विपिन खडसे, जो अभी पूरी तरह से डॉक्टर नहीं बने हैं, उन्होंने ट्रेन में प्रसव पीड़ा से गुजर रही महिला की मदद की. इस महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया.

 बता दें कि विपिन नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस के आख़िरी साल में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं. विपिन बताते हैं कि बीते शुक्रवार जब वो अहमदाबाद-पुरी एक्सप्रेस से सफर कर रहे थे, तो उसी दौरान 24 साल की एक प्रेग्नेंट औरत, जिसका नाम चित्रलेखा है, को लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) शुरू हो गए और ट्रेन को नागपुर पहुंचने में अभी काफी टाइम था क्योंकि ट्रेन नागपुर से करीब 30 किमी दूर था.

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चित्रलेखा और उनके पति ट्रेन में अहमदाबाद से चढ़े थे, जहां दोनों मजदूरी का काम करते हैं. हालांकि महिला के परिवार वालों ने पास के किसी अस्पताल में ले जाने के लिए चेन खींचकर ट्रेन रोकने की कोशिश भी की.

वो बताते हैं, 'मैंने गार्ड और टिकट कलेक्टर को एक राउंड ट्रेन में घूमते देखा कि किसी डॉक्टर की मदद ली जा सके, लेकिन पहले तो मैंने कुछ नहीं बोला और मैं चुप ही रहा क्योंकि ट्रेन में और भी कोई डॉक्टर हो सकता है. लेकिन गार्ड और टीसी को कोई भी नहीं मिला जो महिला की मदद करता, तब मैंने मदद करने की बात की.'

इसके बाद विपिन बताते हैं कि 'डिलीवरी कराने जब मैं पहुंचा, तो मैंने देखा कि प्रेगनेंट चित्रलेखा के शरीर से खून बह रहा था और वह बहुत अधिक दर्द में थीं. मेरे लिए डिलीवरी मुश्किल थी क्योंकि बच्चे के सिर की जगह कंधे बाहर की तरफ निकल रहे थे. मैंने डॉक्टरों के ग्रुप Whatsapp पर यह तस्वीर डाली ताकि सीनियर डॉक्टरों से मदद ले सकूं.'

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डिलीवरी के बारे में विपिन खडसे कहते हैं, 'सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर शिखा मलिक ने Whatsapp के ज़रिये मेरी मदद की. उन्होंने फ़ोन पर मुझे जो भी निर्देश दिए, मैं उनको फॉलो करता रहा. डिलीवरी की मुश्किलों के बारे में उन्होंने कहा, 'महिला के शरीर से बह रहे खून को रोकने के लिए मुझे ठंडी पानी की बोतल का इस्तेमाल करना पड़ा. मैंने ट्रेन में सफर कर रही एक उम्रदराज मां से भी कुछ मदद ली.'

गौरतलब है कि विपिन खडसे एक अच्छे और सफल सर्जन बनना चाहते हैं और वो कहते हैं कि किसी भी डॉक्टर को प्रसव पीड़ा के वक़्त महिला की मदद करना ज़रूर आना चाहिए.

हालांकि, नागपुर स्टेशन की टीम सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंच गई. वहीं रेलवे की महिला डॉक्टर ने बाकी स्थिति का जायज़ा लिया और सिचुएशन को संभाला. इसके बाद चित्रलेखा और उनके पति को दवाइयां देकर आगे सफर करने की इजाज़त दे दी गयी.

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