पुरुषों की तरह स्त्रियों में बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा, जानें कौन सी गलतियां देती हैं इस बीमारी को बढ़ावा और कैसे होगा बचाव

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स्त्रियों में हृदय रोग के मामले अब लगभग पुरुषों जितने ही मिलने लगे हैं। कुछ स्थितियों में स्त्रियों को पुरुषों से भी ज़्यादा ख़तरा हो सकता है। इस समस्या से जुड़ी सावधानियों की दरकार, समझाइशों और जानकारियों को प्राप्त कीजिए इस लेख में।

एक दौर था कि गर्भावस्था और शिशु जन्म के समय ही स्त्री के स्वास्थ्य की सुध ली जाती थी। हालात बदले और अब स्त्री के लिए जीवन पहले से सुरक्षित बना है। लेकिन दूसरा पहलू भी है। कुछ साल पहले जिन रोगों से पुुरुष ही अधिक ग्रसित दिखते थे, अब उनमें स्त्रियों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। इसमें मधुमेह के साथ ही शामिल है हृदय रोग।

ख़तरा क्या है?

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यह बिगड़ी जीवनशैली को जीने वालों और उसके जोखिमों को नज़रअंदाज़ करने वालों का रोग है। तनाव, भोजन में पोषण के प्रति लापरवाही, व्यायाम की कमी, फ़ैट व नमक-शक्कर का अधिक सेवन,आराम की अवहेलना (पर्याप्त नींद का अभाव) और सेहत के प्रति आम लापरवाही, जैसे- जांचें न करवाना हृदय रोग के ख़तरों को कई गुना बढ़ा देता है। रक्तचाप बढ़ा हुआ रहने लगे, मधुमेह हो जाए, मोटापा घेर ले, तब तो दिल पर ख़तरे मंडराने ही लगते हैं।

महिलाएं विशेष क्यों?

पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की क़द-काठी कम होने की वजह से हृदय की बनावट भी प्रभावित होती है। यह क़ुदरती अंतर है। पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं के दिल की धमनियों का व्यास कम होता है‌। यह स्थिति रोग निदान में चुनौतियां पैदा करती हैं। धमनियों का व्यास कम होने की वजह से जब कोलेस्ट्रॉल जमता है, जो धमनियां जल्दी ब्लॉक हो जाती हैं। दूसरी तरफ, यह अवरोध काफ़ी लम्बाई तक होता है, सो स्टंट डालने जैसे उपाय नई चुनौतियां लेकर आते हैं। एंजियोग्राफ़ी और एंजियोप्लास्टी भी अतिरिक्त सावधानी की दरकार रखती हैं।

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लक्षण कैसे उभरते हैं?

1. चलने के दौरान ही नहीं, बैठे-बैठे भी सांस फूलने लगती है।

2. रक्तचाप बढ़ा रहता है।

3. घबराहट होती है।

अब इन लक्षणों को गफ़लत में डाल देते हैं हॉर्मोन की अनियमितता से जुड़े लक्षण, जैसे मेनोपॉज़ यानी रजोनिवृत्ति में जब ठंडा पसीना आता है, घबराहट होती है और कभी सांस भी फूलती है। वहीं जिन युवतियों में रक्ताल्पता यानी एनीमिया होता है, जो कि हमारे देश में तक़रीबन 50 फ़ीसदी महिलाओं की समस्या है, उन्हें कमज़ोरी महसूस होना या सांस की दिक्कत होना सामान्य है। एनीमिया में ख़ून में ऑक्सीजन की संवाहक कोशिकाओं की कमी होती है, लिहाजा सांस फूलती है। आजकल खान-पान की आदतें बहुत बदल गई हैं। ढेर सारे नमक, शक्कर और फ़ैट वाले जंक फ़ूड का भोजन में शामिल होना मोटापे को बढ़ावा दे रहा है, जो सांस, मधुमेह और हृदय तीनों रोगों में इज़ाफ़ा कर रहा है। महिलाएं बार-बार हॉर्मोनल बदलावों से दो-चार होती हैं, सो उनके लिए सेहत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

क्या ग़लतियां होती हैं?

1.भोजन में लापरवाही, जैसे बचा हुआ खाना खा लेना, बासी भोजन कर लेना या अक्सर जंकफ़ूड को ही पूरा भोजन मान लेना।

2. व्यायाम न करना। मोटापे को लेकर गंभीर न होना।

3. रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच न करवाना।

4. भरपूर पोषण, नींद और व्यायाम को लेकर लापरवाही हृदय के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।

क्या करें?

1. अगर परिवार में हृदय रोग की हिस्ट्री है, तो पहले ही सचेत रहें। 30 साल की आयु से ही शुगर, बीपी व अन्य ज़रूरी जांचें करवाती रहें।

2. मोटापे से दूर रहें।

3. 35 साल की आयु से हर साल अपनी लिपिड प्रोफ़ाइल चेक करवाती रहें।

ध्यान दीजिए

1. हृदय रोग को केवल पुरुषों को प्रभावित करने वाला रोग न मानें।

2. पुरुषों में एंजाइना का दर्द बांह में दर्द के तौर पर दिख सकता है, स्त्रियों में दाढ़ के दर्द के रूप में।

3. कुछ अध्ययनों ने संकेत दिए हैं कि बच्चियों के जल्दी रजस्वला होने के कारण भी दिल कमज़ोर हो सकता है।

4. मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम पुरुषों के बराबर हो जाता है।

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