तरुण सागर महाराज की हालत पीलिया के कारण हुई थी गंभीर, एक्सपर्ट से समझें पीलिया के कारण और बचाव

तरुण सागर महाराज की हालत पीलिया के कारण हुई थी गंभीर, एक्सपर्ट से समझें पीलिया के कारण और बचाव
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पीलिया के कारण तरुण सागर महाराज की हालत हुई थी गंभीर, एक्सपर्ट से समझें इस बीमारी के कारण और बचाव के उपाय

डॉक्टरों के मुताबिक, उनके स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार नहीं हो रहा है। वे संथारा ले रहे हैं।

 

हेल्थ डेस्क. जैन मुनि और राष्ट्र संत तरुण सागर (51) की हालत में डॉक्टर्स ने कुछ सुधार होने की बात कही है। 20 दिन पहले उन्हें पीलिया हुआ था, जिसके बाद मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तरुण सागर अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराज की स्वीकृति के बाद संथारा (आहार-जल न लेना) कर रहे हैं। खानपान को लेकर बेहद संतुलित जीवन जीने वाले जैन मुनि को पीलिया क्यों हुआ। पीलिया में सबसे ज्यादा नुकसान लीवर को होता है। dainikbhaskar.com ने इस बारे में गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर महर्षि से जाना कि इसकी वजहें क्या हो सकती हैं। 

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क्या है पीलिया
पीलिया ऐसी अवस्था को कहते हैं, जब मरीज के त्वचा और आंख का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगता है। खून में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। ज्यादातर मामलों में यह दूषित खानपान या मसालेदार भोजन और वायरल इंफेक्शन के कारण होता है। इसके अलावा अधिक अल्कोहल लेने और ब्लड में इंफेक्शन के कारण भी पीलिया हो सकता है। 

दूषित खानपान के अलावा भी हैं पीलिया होने के कई कारण
गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर महर्षि के अनुसार पीलिया के हर मामले में जरूरी नहीं कि इसका कारण दूषित खाना और पानी ही हो। इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे-
1- हेपेटाइटिस बी और सी के वायरस का संक्रमण भी लिवर को काफी नुकसान पहुंचाता है तो पीलिया की स्थिति बनती है।
2- पित्त की नली में स्टोन या कैंसर की गांठ होने से भी ये बीमारी हो सकती है।
3- ऐसी दवाएं जिनमें हैवी मेटल का इस्तेमाल किया गया हो, लगातार इन्हें खाने से भी पीलिया हो सकता है।
4- इनके अलावा संक्रमित खून के चढ़ने से भी ऐसा हो सकता है।

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कब बनती है गंभीर स्थिति
पीलिया की स्थिति में सबसे ज्यादा लीवर प्रभावित होता है। लगातार 2-3 महीनों तक लक्षणों को नजरअंदाज करने पर स्थिति गंभीर बनती है। जैसे हेपेटाइटिस ए और सी का संक्रमण 2-4 हफ्ते तक रहता है या हैवी मेटल ड्रग 4-6 सप्ताह तक ली जाती हैं तो ऐसा हो सकता है। इसके अलावा दूषित खानपान के इंफेक्शन का असर कितनी तेजी से हो रहा है, इस पर भी स्थिति निर्भर करती है। दवाओं से नियंत्रित न होने के बाद स्थिति गंभीर होने पर लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपाय रह जाता है।

शुरुआती लक्षणों से पहचानें तो बचाव है आसान

  • शुरुआत में ही कुछ लक्षणों को पहचान लिया जाए तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। भूख न लगना, बार-बार उल्टी करने का मन करना, पेट के दायीं ओर दर्द होना, वायरल बुखार जैसे शुरुआती लक्षण दिखें तो नजरअंदाज न करें और गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट से सलाह लें। 
  • बचाव के तौर पर लिवर फंक्शन टेस्ट और पेट की सोनोग्राफी करवा सकते हैं। खासतौर पर 50 की उम्र के बाद ये टेस्ट जरूर कराएं।
  • खानपान में साफ-सफाई का ध्यान रखें, पानी उबला पीएं और अधिक ऑयली व मसालेदार खाने से बचें।

क्या है संथारा
जैन धर्म के मुताबिक, मृत्यु को समीप देखकर कुछ व्यक्ति खाना-पीना समेत सब कुछ त्याग देते हैं। जैन शास्त्रों में इस तरह की मृत्यु को संथारा या सल्लेखना (मृत्यु तक उपवास) कहा जाता है। इसे जीवन की अंतिम साधना भी माना जाता है। राजस्थान हाईकोर्ट ने 2015 में इसे आत्महत्या जैसा बताते हुए उसे भारतीय दंड संहिता 306 और 309 के तहत दंडनीय बताया। दिगंबर जैन परिषद ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ के प्रोफेसर वीर सागर जैन ने बताया कि संथारा की प्रक्रिया 12 साल तक चलती है। यह जैन समाज की आस्था का विषय है, जिसे मोक्ष पाने का रास्ता माना जाता है।

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jaundice and prevention measures by Expert
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