मेवात में हावी है अली v/s बजरंगबली

मेवात में हावी है अली v/s बजरंगबली
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अनिल आर्य, मेवात

गुड़गांव लोकसभा के मुस्लिम बहुल मेवात क्षेत्र में चुनावों के दौरान अली-बजरंगबली के साथ साथ रोजगार भी बड़ा मुद्दा होगा। खास बात यह कि भाजपा का दावा है कि मेवात में भरपूर विकास कार्य किए गए हैं, लेकिन इनका सकारात्मक असर कितना पड़ेगा यह कहना अभी मुश्किल है।

मेवात की चुनावी यात्रा में शनिवार को दोनों समुदायों के करीब 50 लोगों से बात की गई। सबसे अहम आउटकम तो यही रहा कि दोनों के बीच धर्म के नाम पर एक स्पष्ट लकीर खींची हुई है। अधिकांश मेव मुस्लिम मोदी के खिलाफ़ जाते दिख रहे हैं वहीं हिंदुओं का बहुमत भाजपा के साथ है। अली व बजरंगबली की सियासत का यह प्रभाव आसानी से खत्म होता नहीं दिखता। मोदी के प्रति बेरुखी का आलम यह कि इस बार चेहरा देखकर वोट देने की बजाए भाजपा को हराने के लिए एकजुट होकर कांग्रेस को वोट देने की बात कही जा रही है। मेवात की सियासत में अभी तक पार्टी से परे व्यक्ति के पक्ष या विरोध में अधिक रही है। यह नहीं कहा जा सकता कि व्यक्ति विशेष का प्रभाव बिल्कुल शून्य होगा लेकिन लगता यही है कि यह समुदाय भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को वोट देने को प्राथमिकता दे।

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गांधीग्राम घासेड़ा के बस स्टैंड पर करीब डेढ़ दर्जन उम्रदराज मेवों से बात हुई। तीन युवा भी मिले। सभी मुस्लिम। 12वीं के एग्जाम दे चुके लियाकत अली का कहना था कि वो पहली बार वोटिंग करेगा लेकिन उसे भाजपा कतई पसंद नहीं है। उसका कहना है कि मोदी वाले हिंदूवाद की बात करते हैं। अली या बजरंगबली की बात करते हैं। यह गलत है। भाजपा ने कहा था कि वो 15 लाख देगी। 2 करोड़ लोगों को रोजगार देगी, कहां हैं 15 लाख। कहां हैं रोजगार। मैं भाजपा को वोट नहीं दूंगा। जबकि करीब 50 साल के शब्बीर ने कहा कि मैं मोदी को वोट दूंगा। बिना रिश्वत के काम हो रहे हैं। उजीना ड्रेन से पानी आने की वजह से फसलों को पानी मिला है। जबकि लगभग इसी उम्र के आमीन इसके ठीक उलट बात करते हैं। उनकी हां में हां मिलाने वालों में हसन मोहम्मद, ताहिर भी थे। आमीन तो कुछ अधिक ही तैश में थे। उनका कहना था कि मोदी वालों ने देश को बांट दिया है।

हिन्दू मुस्लिम के बीच माहौल इससे पहले इतना खराब कभी नहीं हुआ। कांग्रेस का चाहे जो उम्मीदवार हो वोट उसको देंगे। किसी बड़े मेव नेता के पीछे नहीं लगेंगे। अयूब का कहना था कि गांव में करीब 10 हजार वोट हैं। 90 फीसदी मेव वोट हैं। अधिकतम वोट कांग्रेस के साथ जाएंगी। यहां यह बात भी सामने आई कि लोगों के पास रोजगार के साधन कम हुए हैं। पहाड़ से पत्थर काटने का काम बंद है। ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन रहे। यह भी भाजपा विरोध की वजह है। साथ ही राव इंद्रजीत का जीत के बाद इस इलाके से दूर भागना भी इन्हें नाराज कर रहा है। 

बड़ेलाकी गांव के वाजिद अली पुलिस में हैं। वो हरियाणा की मनोहर लाल सरकार की इस बात के लिए जी खोलकर तारिफ करते हैं कि नौकरियों में भेदभाव नहीं हुआ। मैरिट पर भर्ती हुई हैं। सड़कों का काम भी हुआ है। लेकिन रोजगार के साधन कम हुए हैं। इसी गांव के राकेश, निसार, साहिल व अब्बास भी इससे सहमत हैं। बावजूद इसके अधिकांश मेव भाजपा के साथ नहीं जाएगा। आय के साधन कम होना बहुत बड़ी शिकायत है। अली बरजंग बलि का भी नुकसान भाजपा को सहना पड़ेगा। रेवासन गांव के साबिर व सद्दाम भी भाजपा के साथ नहीं है। 

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नूंह के मुख्य बाजार व अनाज मंडी में माहौल कुछ और है। अनाज मंडी में एक बड़ी आढ़त के मालिक गोवर्धन दास का कहना है कि मेवात में दोनों पक्ष बंटे हुए हैं। हिन्दू भाजपा व मेव कांग्रेस के साथ जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं कि दोनों ओर से सारी वोट एक ही पक्ष में होंगी फिर भी 90 फीसदी से अधिक रुझान इसी आधार पर होगा। मलाई वालों के नाम से मशहूर कमलेश मंगला के कपड़े के शो रूम पर मनोज मंगला, शंकर मंगला, एडवोकेट अक्षय, मोहम्मद जकरिया, साजिद, अशरफ एडवोकेट आदि का मत भी लगभग यही था। विकास की बजाए यहां अली बजरंगबली का नारा अधिक बुलंद होने वाला है। स्पष्ट है कि मेवात की नब्ज धर्म के नाम पर अधिक धड़कती है।

जेजेपी और AAP पार्टी के उम्मीदवार का इंतजार हुआ दिलचस्प

कांग्रेस के कैप्टन अजय यादव के बाद यह देखना रोचक होगा कि जेजेपी और आम आदमी पार्टी किसे मैदान में उतारती है। अधिकांश मेव मतदाताओं का कहना था कि उनकी च्वाइस भाजपा को हराने वाला कैंडिडेट है। ऐसे में इस गठबंधन पर दबाव है कि या तो वो ऐसा बड़ा मेव चेहरा मैदान में उतारें जो अहीर सहित अन्य समुदायों में भी वोट ले सके और संघर्ष को त्रिकोणीय बना सके। वहीं इनेलो के प्रत्याशी पर नजर तो है, लेकिन यह माना जा रहा है कि वो जीत की स्थिति में ना हो। हाल फिलहाल तो मेवात में कांग्रेस ही हावी दिख रही है। कई मतदाता यह भी मानते हैं कि मेव के नाम पर एक जुटता दिखाने की बजाए उसके साथ जाया जाए तो भाजपा को हरा सके। 

मेवात में BJP की अग्निपरीक्षा

अली-बजरंगबली के समीकरणों में मेवात में असल परीक्षा होगी भाजपा के उन मेव नेताओं की जो पांच साल से भाजपा की सत्ता में भागीदारी कर रहे हैं और आने वाले विधानसभा चुनावों में टिकट भी चाहते हैं। मेवात में नूंह, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना और सोहना विधानसभा का तावडू क्षेत्र आता है। यहां 80 से 85 फीसदी मेव मतदाता है। यह मतदाता स्वाभाविक तौर पर भाजपा विरोधी माना जाता है, लेकिन इन पांच सालों में कई ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने भाजपा सरकार यानी हरियाणा की मनोहर व केंद्र की मोदी सरकार की माला जपी है। पुन्हाना के विधायक रहीश खान तो शुरू से ही निर्दलीय होते हुए भी भाजपाई ही हैं। वहीं अन्य हल्कों में भी मेव भाजपाई नेता कम नहीं हैं। ये मेव नेता कितनी वोट दिला पाते हैं, यह अहम सवाल होगा। राव इंद्रजीत से दोनों पक्षों में नाराजगी इस बात को लेकर है कि सासंद बनने के बाद उन्होंने इलाके की सुध नहीं ली। यह मुद्दा बहुत बड़ा भले ही नहीं है, लेकिन भाजपाइयों को सुनना तो पड़ेगा ही। हां, हिन्दू समुदाय की अधिकतम।वोट भाजपा को जाएंगी और यदि हिन्दू मुस्लिम का धुर्वीकरण तीखा हुआ तो यहां के साथ साथ गुड़गांव और रेवाड़ी जिलों में भाजपा के पक्ष में इसका रिएक्शन हो सकता है।
खास बात यह कि मेवात का आम आदमी भी मानता है कि खट्टर सरकार में नौकरियों में पूरी तरह ईमानदारी बरती गई। सड़कों के साथ साथ।विकास के और भी काम हुए हैं। लेकिन बावजूद इसके उनके पास रोजगार के साधन नहीं हैं। पहाड़ से पत्थर तोड़ने का काम बंद है। यह काम गैर कानूनी था, पर घर में पैसा आ रहा था। ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन रहे जबकि यहां के युवाओं का बड़ा हिस्सा ड्राइवरी करता है। यूनिवर्सिटी की मांग भी अधूरी है। इन मुद्दों पर भाजपा को जवाब देना ही होगा।

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