AAP की वो बैठक, जिसमें सबकी नजर रहेंगी 'कुमार विश्वास' पर

AAP की वो बैठक, जिसमें सबकी नजर रहेंगी 'कुमार विश्वास' पर
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नई दिल्ली। मिशन 2019 को लेकर 'आप' की एक अहम बैठक आज दिल्ली में होने जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। इस बाबत ये बैठक बुलाई गई है। यह लोकसभा चुनाव को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर होगी।

इसमें लोकसभा चुनाव और दूसरे राज्यों में संगठन का विस्तार मुख्य रूप से दो मुद्दे हैं। बैठक में इस बात की समीक्षा होगी कि तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर कहां कमी रही और भविष्य को लेकर क्या रणनीति होनी चाहिए। कुछ अन्य मामलों को लेकर भी प्रस्ताव आने की उम्मीद है। बता दें कि राष्ट्रीय परिषद ही पार्टी की संवैधानिक व्यवस्था को तय करती है।

इस अहम बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव-2019 की रणनीति बनाने के साथ संगठन के विस्तार पर भी गहन मंत्रणा होगी। कहा जा रहा है कि शनिवार को होने वाली बैठक में पार्टी के संविधान संशोधन को लेकर भी प्रस्ताव भी आ सकता है।

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पार्टी सूत्रों ने बताया कि AAP के संविधान में संशोधन किए जाने की संभावना है, जिससे एक व्यक्ति के अधिकतम दो बार पार्टी पदाधिकारी रहने के प्रावधान को बदला जा सके।

इसका मतलब यह है कि आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हमेशा के लिए पार्टी प्रमुख बने रह सकते हैं। केजरीवाल अप्रैल, 2016 में तीन साल के लिए दूसरी बार AAP के संयोजक चुने गए थे। सूत्रों ने बताया कि अगले साल अप्रैल में पार्टी के राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाए जाने की संभावनाएं कम हैं, क्योंकि पार्टी कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में व्यस्त होंगे।

आपको बता दें कि इससे पहले जब 2016 में पार्टी के संविधान में संशोधन किया गया था उसके बाद पार्टी के कुछ बागी नेताओं ने दबी जुबान से इसका विरोध किया था। पार्टी संविधान के अनुसार, ‘कोई भी सदस्य पार्टी पदाधिकारी के रूप में एक ही पद पर तीन-तीन साल के लिए लगातार दो बार से ज्यादा नहीं रह सकता है।’

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वहीं, AAP के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास भी आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं और क्या वे इस बैठक में शामिल होने आएंगे? इसको लेकर संशय कायम है।

गौरतलब है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में AAP नेता कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी के टिकट पर उत्तर प्रदेश के अमेठी सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन कुमार विश्वास की जमानत जब्त हो गई थी। वह चौथे नंबर पर रहे थे। अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीत दर्ज की थी और भारतीय जनता पार्टी की स्मृति ईरानी दूसरे स्थान पर रहीं थीं।

जानें- कुमार विश्वास की खूबियां

देश के जाने माने कवि कुमार विश्वास अन्ना आंदोलन के वक्त से केजरीवाल के साथ थे। इसके बाद वर्ष 2012 में पार्टी बनाए जाते वक्त उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूर रहने की इच्छा जताई थी, लेकिन उस वक्त केजरीवाल उन्हें खींच कर पार्टी में लाए थे। चुनावों में प्रचार के दौरान भी कुमार विश्वास भीड़ जुटाऊ नेता साबित होते रहे हैं।

केजरीवाल-कुमार विश्वास में दूरी बढ़ी

यहां पर बता दें कि कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी रहे डॉक्टर कुमार विश्वास अब अरविंद केजरीवाल के साथ नहीं हैं। राजनीतिक दुश्मनी ने दोनों को अलग-अलग कर दिया है। जब से इस दोस्ती में दरार आई तब ही से कई मौकों पर कुमार विश्वास दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर तंज कसते रहे हैं।

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