सपनों की 'मायावी दुनिया' का रहस्यमयी सच

सपनों की 'मायावी दुनिया' का रहस्यमयी सच
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स्वप्न का हमारे जीवन के साथ गहरा तादात्म्य है। स्वप्न क्यों आते हैं, उनका वास्तविक जीवन से क्या संबंध है, क्या स्वप्न सच के प्रतिबिम्ब होते हैं, क्या स्वप्न जीवन को प्रभावित करते हैं- ऐसे अनेक प्रश्न हैं जो बंद पलकों के पीछे की इस रोमांचक दुनिया से जुडे़ हैं। इस ख्वाबों की दुनिया के रहस्य की पडताल सदियों से होती रही है। लेकिन अनेक अनुसंधानों और खोजों के बावजूद आज भी स्वप्न की यह मायावी दुनिया रहस्य ही बनी हुई है। 

 

ललित गर्ग

स्वप्न का जन्म कब, कैसे और कहां हुआ? यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। लेकिन इतना तो बताना संभव है कि जिस दिन मानव ने सृष्टि पर चरणन्यास किया उसी समय से स्वप्नपरी के सुंदर दृश्यों एवं नाटक का श्रीगणेश हो गया। गर्भस्थ शिशु तो क्या पशु-पक्षी भी स्वप्नलोक में विचरण करते हैं तभी तो कहावत प्रसिद्ध है ‘सोयी बिल्ली तो चूहों के ही स्वप्न देखा करती है।’

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सपने क्या हैं? क्या ये बात सही है कि जिसकी जैसी सोच होती है, उसे वैसे ही स्वप्न आते हैं। क्या इनका रिश्ता होता है अतीत, पिछले जन्म और भविष्य से? सपनों की अनगिनत कहानियां हैं और वैसे ही तो हैं रंग-बिरंगे स्वप्न। प्रसिद्ध दार्शनिक सिगमंड फ्रायड ने पहली बार स्वप्नों की प्रक्रिया, संरचना, रहस्यों और कारणों पर प्रकाश डाला।

उनका कहना है कि  जब हम नींद की स्थिति में होते हैं तो हमें सबसे ज्यादा सपने आते हैं। हर इंसान स्वप्न देखता है, निद्रा की अवस्था में उसके बिम्ब उभरते हैं। आंखें खुलते ही स्वप्न की सारी दुनिया बिखर जाते हैं। स्वप्न बहुत नाजुक होते हैं, तितली के परों सरीखे, वे गुलाब की पंखुरी पर ओस की एक मोती-सी बूंद जैसे होते हैं।

वास्तव में स्वप्न एक ऐसी स्थिति है, जहां हम जाग्रत नहीं बल्कि निद्रावस्था में होते हैं। यह निद्रावस्था रात्री के आखिरी प्रहर की होती है, जब हम गहरी नींद में होते हैं। हमारी आंखें बंद पलकों के पीछे ज्यादा सक्रिय होती है और तेजी से घूमती है। मस्तिष्क भी ज्यादा क्रियाशील होता है।

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इसीलिए हम कई बार देखे गए सपने को सुबह उठने के बाद भी हू ब हू याद रखते हैं, कई बार बस हल्की सी एक झलक भर याद रह जाती है। जिससे पता चलता है, हमारी सपने में किसी से मुलाकात हुई थी, सपने में हम किसी के पास आए थे, सपने में हमें किसी स्थान-विशेष पर ले जाया गया था, किसी रहस्य से पर्दा उठाया गया था लेकिन यादों की यह डोर बहुत कमजोर और टूटी-फूटी सी होती है।

सपनों का वह समूचा जगत इसके साथ गहरे तक जुड़े लोगों के लिए तो मायने रखता है, लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो अपनी समझ और सक्रिय दिमाग की विवेचना शक्ति से इस सबको महज भ्रम साबित कर देते हैं।

 

लेकिन सपनों की दुनिया के बारे में, अभी अंतिम रूप से दुनिया कुछ नहीं कह सकती। इसकी एक वजह यह भी है कि तमाम वैज्ञानिकों ने इस बात का खुलासा किया है कि उन्हें उन महान आविष्कारों की जानकारी और समझ किसी दिन सोते हुए सपने में आयी और न सिर्फ यह सपना याद रहा बल्कि उन्होंने महान आविष्कार कर डाले।

वैज्ञानिकों की ये बातें मनोवैज्ञानिकों की उन बातों को काटती हैं, जिसमें वो कहते हैं सपने कुछ नहीं हमारे दिन भर की गतिविधियों के ही नतीजे होते हैं। लेकिन क्या ऐसी कोई थ्योरी या ऐसा कोई आविष्कार भी हमारी दिन भर की दिमागी गतिविधि का हिस्सा हो सकता है, जिसका अभी तक दुनिया में अस्तित्व ही न हो?

 

कुछ लोग अपने सपनों को दूसरों से बता तो नहीं पाते मगर ऐसे लोग पुरजोर दावे से कहते हैं उनके दिलों दिमाग में एक परछाई की तरह कोई धुंधला दृश्य, कोई धुंधली तस्वीर घूम रही है, पर इससे ज्यादा कुछ पता नहीं चल पा रहा कि उसका मकसद क्या है? उसका कहना क्या है? दरअसल कुछ सपने बेहद निजी होते हैं, वह हमारे जिंदगी के अच्छे किसी खास मौके का टुकड़ा होते हैं या उसकी कुछ अच्छी काल्पनिक का विस्तार होते हैं, ऐसे सपने हमें याद रहते हैं। ऐसे सपने हमारे दिल के करीब होते हैं। 

  Next slide: आगे पढ़ें-कैसे होते हैं सपने

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