कैसे बचा पाऐगें बेटियों को

कैसे बचा पाऐगें बेटियों को
Advertisement

 

 

प्रवीण शर्मा। प्रधानंमंंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी तब उनका पहला नारा बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओ था। हरियाणा के ऐतिहासिक शहर पानीपत से इस मुहिम का आगाज खुद प्रधानमंंत्री ने किया था। लेकिन जैसे जैसे भाजपा सता के पादयदान पर बढ़ती चली गई तो अपने वादे भी दरकिनार करती चली गई। पिछले चार सालो मेंं बेटिंया कितनी सुरक्षित है यह सभी को पता है। आऐ दिन कही ना कही कोई रेप की घटना मीडिया की सुर्खीयों मेंं होती है। ऐसे करने वाले अधिकांश लोग प्रभावशाली होते है। पुलिस उन पर हाथ डालने में घबराती नजर आती है। मामला जब मीडिया में तूल पकड़ा है तो कार्यवाही की जाती है। उन्नाव में एक पिता अपनी बेटी को इसांफ दिलाते हुए मारा गया भाजपा के दबंगो ने सता के मद मेंं सभी कानून ताक पर रख साबित कर दिया कि भाजपा का राज भी अन्य पार्टियों की तरह ही साबित हो गया। कठुआ की घटना को धर्म का रूप देकर आरोपियों को समर्थन किया जा रहा है। बाद में भाजपा को अपनी रेपूटेशन बचाने के लिए दो मंत्रियों के इस्तीफे मागंने पड़ गए। लेकिन क्या इस्तीफे से इन भाजपा के नेताओं की मानसिकता बदल गई। ऐसा नही है यह तो राज बचाने का एक तरीका था। सूरत और राजकोट की घटना और भी दिल दहला देने वाली है। जिस राज्य का माडल प्रधानमंत्री पूरे देश में लागू करना चाहते थे उसी राज्य में दो बच्चियों के साथ हवानियत देश को हिलाने के लिए काफी ह। निर्भया काड़ के बाद एक बार फिर जनता सडक़ पर है। लेकिन राजनैतिक दलो पर इसका कोई असर नही दिखाई देता।

Advertisement

 

जिस भारत देश में साल मेंं दो बार बेटियों की पूजा की जाती है आज वे घर में सुरक्षित नही है। सरकार को कड़े कानून के साथ साथ लोगो की मानसिकता बदलने के लिए भी कदम उठाने होगे। समाज को सोचना होगा की हमारे ही बीच ये वहशी दरिंदे कोैन है तो हमारी मासूम बेटिंयो का बचपन कुचल रहे है। कही ना कही ये हमारी और आपकी सबकी जिम्मेवारी बनती है कि इन दरिंदो को पहचान कर इन्हे समाज से बाहर कर अपनी बेटिंयो को सुरक्षित करे। जहां तक राजनैतिक पार्टीयों की बात  है उन्हे तो सिर्फ सता के लिए ढकोसला करना है। सरकार चाहे किसी दल की हो इन्हे तो सता ही चाहिए। समाज और देश से इन्हे कुछ लेना देना नही है जनता विरोध करेगी तो पुलिस है सभालने के लिए जनता को सोचना होगा कि देश में किस तरह का लोकतत्रं है। अपनी ही बेटिंयों को बचाने के लिए अपने ही चुने हुए जनप्रतिनिधियों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ता हेै। अब ये सोचने का समय है कि कैसे बच पाऐगी हमारी मासूम बेटिंया।

Tags:

#rape khabarlive crime uttarpardesh unnao kathua
Advertisement