रोज़े में गोमांस नहीं, गोरस!

रोज़े में गोमांस नहीं, गोरस!
Advertisement

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने इस बार एक जबर्दस्त फैसला किया है। उसके हजारों सदस्य रमजान के दिनों में जो इफ्तार करेंगे, उसमें गोमांस नहीं परोसा जाएगा। उसकी जगह रोज़दारों का उपवास गोरस याने गाय के दूध से खोला जाएगा। क्या कमाल की बात है, यह! यह बात मैं मुस्लिम देशों के कई मौलानाओं, राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, प्रोफेसरों और पत्रकारों से वर्षों से कहता आ रहा हूं। कुछ देशों में इसका पालन भी होने लगा है। मैं तो उनसे कहता हूं कि गाय का ही नहीं, किसी भी जानवर का गोश्त क्यों खाया जाए? 

 

Advertisement

रोज़ा जैसा महान पवित्र और आध्यात्मिक कार्य आप संपन्न करें और उसके बाद अपना भेट भरने के लिए किसी जानवर को मौत के घाट उतार दें, यह अल्लाह की कौनसी इबादत हुई? यह कौनसी रहमत हुई? यह कौनसी करुणा है? यह कौनसी तपस्या है? कुरान शरीफ या बाइबिल या जेन्दाबस्ता में कहां लिखा है कि मुसलमान या ईसाई या यहूदी होने के लिए गोश्त खाना जरुरी है? जो शाकाहारी हैं, वे भी क्या उत्तम मुसलमान नहीं हैं? मैं तो कहता हूं कि जो लोग आदतन गोश्तखोर हैं, उन्हें भी रमजान के पवित्र दिनों में गोश्त, शराब और शारीरिक संबंधों से परे रहना चाहिए। पूर्ण ब्रह्चर्य का पालन करना चाहिए। तभी उनकी तपस्या बेजोड़ होगी। 

 

यदि हमारे देश के मुसलमान भाई मेरे इस निवेदन को मानने लगें तो सारी मुस्लिम दुनिया के वे सबसे बेहतरीन मुसलमान माने जाएंगे। डेढ़ हजार साल पहले अरबों की मजबूरी रही होगी कि वे मांसाहार करें लेकिन आज की दुनिया में शाकाहारी चीजें सर्वत्र सुलभ हैं। रमजान की तपस्या के दिनों में चित्त ओर पेट दोनों को शांत रखने के लिए शाकाहार से बढ़िया क्या हो सकता है? यदि भारतीय मुसलमान इस रास्ते पर चलें तो वे इस्लाम की इज्जत में चार चांद लगा देंगे। 

Advertisement

मैंने अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान में रहते वक्त रमज़ान के दिनों में ऐसे रोज़े रखे, जिनमें मैंने ‘सहरी’ भी नहीं की और 24 घंटों में सिर्फ एक बार हल्का खाना खाया और पानी पिया। सिर्फ इफ्तार किया। यह उपवासों का उपवास सिद्ध हुआ। मेरे मुसलमान मेज़बानों को मैंने बताया कि हिंदुस्तान में ऐसे फिरके भी हैं, जिनमें लोग हफ्तों तक सिर्फ पानी ही पीते हैं और कुछ भी नहीं खाते। कभी-कभी वे पानी पीना भी बंद कर देते हैं। तपस्या ऐसे ही होती है। दूसरों को मारना नहीं, खुद को तपाना पड़ता है।

Tags:

Cow Beaf Iftar गोमांस रमज़ान इफ्तार हिंदुस्तान मुसलमान
Advertisement