झज्जर के छोटे से गांव से 'दिल्ली तक का सफर'

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जड़ों से जुड़ें युवा : डॉ नन्द किशोर गर्ग

डॉ. विनीता गुप्ता

गुरुग्राम/झज्जर/नई दिल्ली। अपने घर अपनी जमीन से दूर जाकर कहीं और खुद को स्थापित करना और वहां धाक जमाना आसान नहीं है। देश-स्वदेश में से अनेक अनिवासी हरियाणावी (non-resident Haryanvi) हैं जिन्होंने यहां से जाकर न केवल स्वयं को एक विशेष मुकाम पर पहुंचाया वरन औरों के लिए अनुकरणीय भी बन गए।

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उनके मन वचन कर्म में हरियाणवी माटी की सौंधी महक और संस्कार, परम्परा भी वैसी ही बनी रहीं। आज भी वो अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। हरियाणा नाउ का प्रयास है ऐसे ही हरयाणवी हस्तियों से पाठकों को रूबरू करवाना। 

इसी कड़ी में प्रस्तुत है जिला झज्जर के जसोर खेडी गांव से निकले  डॉ. नन्द किशोर गर्ग का जीवन वृत। दिल्ली विधान सभा में 10 साल तक त्रिनगर से विधायक रहे डॉ. गर्ग एक सफल उद्योगपति तो हैं ही शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। 

यूं तो तमाम लोग जीवन जिये जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो काल के कपाल पर रोज़ नई इबारत लिखने में यकीन करते हैं। ऐसे ही लोगों में एक नाम हैं डॉ. नन्द किशोर गर्ग का। कौन जानता था कि हरियाणा के जिला झज्जर के जसोर खेडी गांव में 26 जनवरी 1949 को के. सी. गर्ग के घर जन्मा बालक नन्द किशोर इस तरह जन-जन के जीवन से जुड़ जाएगा कि लोग यह कहने लगेंगे-

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मोम सा दिल, रेत जैसी प्यास, सब कुछ मिल गया

आप हैं जब से हमारे पास सब कुछ मिल गया

उनकी राजनेता, सामाजिक कार्यकर्त्ता, परोपकारी और शिक्षाविद  के रूप में इस मुकाम तक पहुँचने की एक लम्बी यात्रा रही जिसमें लगन, समर्पण, बुद्धि कौशल और कर्मठता बराबर झलकती है। जीवन यात्रा शुरू हुई हरियाणा के झज्जर से।

उसी साल परिवार दिल्ली आ गया, लेकिन गांव जसौर खेड़ी से सूत्र लगातार जुड़े रहे। यह बात अलग है कि परिवार की धर्मशाला को इनके दादा मूलचंद ने सरकार को दे दिया था जिसे कन्या पाठशाला में बदल दिया गया था।

वहां  के पांडव कालीन  देवी मंदिर तो आज भी साल में दो बार परिवार पूजा करने जाता है।  इस सम्बन्ध में चर्चा करते हुए डॉ. गर्ग बताते हैं, "पहले गाँव में ज़्यादातर लोग आर्य समाजी हो गए थे, लेकिन 1986 में हमने जब मंदिर का पुनर्निर्माण कराया तो लोग वापस सनातन धर्म की ओर लौट आये। "11वीं तक पढ़ाई दिल्ली में हुई। 1966 में  प्री इंजीनियरिंग हरियाणा के सोनीपत गए। वे बताते हैं," यही वो समय था जब हरियाणा बनाने के लिए आन्दोलन चल रहा था। 1967 में हरियाणा अलग राज्य बन भी गया था।"

 

Next Slide आगे पढ़े डॉ. गर्ग के अनेक योगदानों के बारे में...

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