GST: मोदी = नेहरु+पटेल: डॉ. वैदिक

GST: मोदी = नेहरु+पटेल: डॉ. वैदिक
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डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘एक देश, एक टैक्स’ के एतिहासिक कदम का विरोध प्रमुख विरोधी दल तो कर ही रहे हैं, देश का व्यापारी वर्ग भी कर रहा है। देश के कई प्रमुख नगरों में दुकानों की हड़ताल हो गई है, कई कंपनियों ने अगले 3-4 दिनों के लिए अपने पट बंद कर दिए हैं और कई छोटे-बड़े व्यापारी नई कर-व्यवस्था पर अमल करने के तरीके ढूंढ रहे हैं। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गदगद हैं।

उन्होंने इस नए एकात्म कराधान का स्वागत ऐसी नाटकीय धूमधाम से किया है, जैसे कि 14 अगस्त 1947 की मध्य-रात्रि को जवाहरलाल नेहरु ने किया था। उन्होंने ‘500 तरह के करों’ को मिलाकर एक करने के दावा भी वैसे ही किया है, जैसी कि सरदार पटेल ने 500 देसी रियासतों का विलय करवाया था। याने अब मोदी बराबर नेहरु और पटेल ! मोदी= नेहरु+पटेल ! यह प्रचारमंत्री का कोरा प्रचार पैंतरा भर नहीं रहेगा, यदि इस एकात्म कराधान को वे वास्तव में लागू कर पाए तो ! मेरे ख्याल से चुनाव के 20 महिने पहले मोदी ने यह सबसे बड़ा खतरा मोल ले लिया है।

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मोदी की ‘फर्जीकल स्ट्राइक’ और ‘नोटबंदी’ के धक्के तो राष्ट्र ने बर्दाश्त कर लिये लेकिन यदि यह एकात्म कराधान पिट गया तो 2019 में भाजपा का वही हाल होगा, जो दिल्ली प्रदेश के चुनाव में उसका हुआ था। भाजपा और संघ की रीढ़ मूलतः व्यापारी वर्ग ही रहा है। यदि वही उखड़ गया तो भाजपा का खड़े रहना भी मुश्किल हो जाएगा।

मोदीजी कहीं भाजपा का वही हाल न कर दें, जो राहुलजी ने कांग्रेस का कर दिया है। इस समय देश के नागरिकों का कर्तव्य है कि वे ‘एक देश, एक टैक्स’ की इस महान योजना को सफल बनाने की भरपूर कोशिश करें, हालांकि सरकार की तैयारी काफी कम है। विरोधी दलों द्वारा इसका विरोध बिल्कुल अनैतिक है, क्योंकि उनकी राज्य सरकारों ने इस पर सहमति दी है।

वे स्वयं तीन साल पहले यह कानून बनाने के लिए कमर कसे हुए थे। इस एतिहासिक कदम को वे पार्टीबाजी के पचड़े में नहीं फंसाते तो बेहतर होता। इस नए एकात्म कराधान की कमियां जैसे-जैसे मालूम पड़ती जाएंगी, उन्हें बताना विरोधियों का काम है और उन्हें दूर करना सरकार का !

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