‘वन मैप गुरुग्राम से होगी गुरुग्राम के विकास कार्यो की निगरानी

‘वन मैप गुरुग्राम से होगी गुरुग्राम के विकास कार्यो की निगरानी
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गुरुग्राम(प्रवीण शर्मा)। गुरुग्राम ज्योग्राफिकल मैपिंग अर्थात् जीआईएस मैपिंग वाला उत्तर भारत का पहला शहर बन गया है और यह जिओ मैपिंग गुरुग्राम में पानी, सीवरेज, बिजली, सडक़ आदि की मास्टर सर्विसिज़ का ना केवल आधार बनेगा बल्कि इससे आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने तथा अतिक्रमण को भी रोकने में मदद मिलेगी। 

इस बारे में आज गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी उमाशंकर ने गुरुग्राम के नए लोक निर्माण विश्राम गृह में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी। इस सम्मेलन में जीआईएस मैपिंग के बारे में एक विस्तृत प्रैजेंटेशन भी दी गई जिसे देखने के लिए हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन डा. के के खंडेलवाल भी मुख्य रूप से पधारे थे। प्रैजेंटेशन हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सैंटर(हरसैक) के सीनियर साईंटिस्ट डा. सुल्तान सिंह ने दी। 

मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी उमाशंकर ने बताया कि गुरुग्राम के सरकारी विभागों का एक कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के उद्द्ेश्य से गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की देखरेख में सैटेलाइट इमेजरी लेकर ‘वन मैप गुरुग्राम’  तैयार किया जा रहा है। जीएमडीए के क्षेत्र में अभी सरकारी विभागों से प्राप्त सूचना के आधार पर डेटा फीड कर जीआईएस मैपिंग की जा रही है और उसकी अब ड्रोन मैपिंग से वैलिडेशन अर्थात् पुष्टि का कार्य शुरू किया गया है। जीएमडीए के क्षेत्र में गुरुग्राम मानेसर अर्बन कॉम्पलैक्स(जीएमयूसी) का पूरा क्षेत्र आता है।

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 उमाशंकर ने बताया कि सैटेलाइट इमेजरी में 50 सेंटीमीटर का रेजोल्युशन प्राप्त हो रहा है और ड्रोन मैपिंग से वैलिडेशन होने के बाद 5 सेंटीमीटर के रेजोल्युशन में इमेजरी प्राप्त होगी, जिसका मतलब है कि धरातल से मात्र 5 सेंटीमीटर ऊंचाई की वस्तु भी ऑनलाइन जूम करने पर साफ दिखाई देगी। उन्होंने बताया कि यह वैलिडेशन का कार्य अप्रैल माह के अंत तक पूरा होने का अनुमान है, उसके बाद जीआईएस मैपिंग की पूरी सूचना पब्लिक डोमेन पर डाल दी जाएगी, जहां से इसे कोई भी देख सकेगा। उन्होंने बताया कि इस जीआईएस मैपिंग में 144 से ज्यादा लेयर स्टैंडर्डाइज की जा चुकी हैं, जिसका मतलब है कि विभिन्न विभागों द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सेवाओं, चाहे जमीन के ऊपर हो या नीचे, इस जीआईएस मैपिंग में अलग-अलग कलर कोड में दर्शाया गया है। इससे यह लाभ होगा कि सरकारी विभागों के अधिकारियों को यह पता चल सकेगा कि जमीन के नीचे पीने के पानी, सीवरेज, टेलिफोन आदि की लाइने कहां से गुजर रही हैं। उन्होंने बताया कि जीआईएस मैपिंग का सारा डेटा क्लाऊड में स्टोर किया जा रहा है। 

 

उन्होंने बताया कि वन मैप गुरुग्राम में एकत्र डाटा नगर निगम अपने क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर संंबंधी कई महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे पाइपलाइन डलवाने, जिला का नक्शा तैयार करने , प्रोपर्टी टैक्स, अतिक्रमण, अवैध निर्माण हटवाने आदि में प्रयोग करके बेहतर योजनाएं बना सकेगा। इसी प्रकार, इस सुविधा का सभी विभागों को लाभ होगा परंतु मुख्य रूप से नगर निगम, बिजली निगम, टाऊन एंड कंट्री प्लानिंग, जिला प्रशासन तथा पुलिस विभाग इसका ज्यादा लाभ उठा पाएंगे। उदाहरण के तौर पर पुलिस विभाग इस जीआईएस मैपिंग से यह पता कर पाएगा कि किस क्षेत्र में क्राइम रेट ज्यादा है, उसी अनुरूप उस क्षेत्र मे क्राइम को कंट्रोल करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग डेंगू व मलेरिया के मरीजों की अधिक संख्या वाले क्षेत्रों की पहचान करके भी इन बीमारियों की रोकथाम की योजना बना सकता है।

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उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर जीएमडीए द्वारा 12 करोड़ रूपये की राशि खर्च किए जाने का प्रावधान किया गया है। एक प्रश्न के जवाब में  उमाशंकर ने बताया कि विभागीय डेटा वन मैप गुरुग्राम पर अपलोड करने के लिए सभी विभागों से एक या दो कर्मचारियों व अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी जो इस कार्य में अपना सहयोग करेंगे। इस परियोजना के तहत विभिन्न विभागों से लगभग 65 कर्मियों का स्टाफ नियुक्त किया जाएगा। इसके साथ जीएमडीए द्वारा अपने कार्यालय के एक फ्लोर पर कमांड एंड कंट्रोल सैंटर भी स्थापित किया जाएगा। यह सैंटर वैसा ही होगा जैसा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वड़ोदरा में शुरू किया था। उन्होंने बताया कि इस कमांड एंड कंट्रोल सैंटर से सभी मुख्य विभाग जोड़े जाएंगे। एक अन्य सवाल के जवाब में  उमाशंकर ने बताया कि जीएमडीए द्वारा अपने क्षेत्र में सडक़ों पर लगभग 5000 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और उनकी फीड कमांड एंड कंट्रोल सैंटर में आएगी। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि सडक़ों के बर्म ठीक करने के लिए जीएमडीए द्वारा हाल ही में ढाई करोड़ रूपये के टैंडर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस डेटा बेस में खसरा नंबर के साथ जमीन का रिकॉर्ड दर्ज होगा जिससे कि लैंड गर्वनेंस में मदद मिलेगी। 

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