नागरिक अस्पताल मेंं डाक्टर की दादागिरी

नागरिक  अस्पताल मेंं डाक्टर की दादागिरी
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प्रवीण शर्मा
गुरूग्राम के सरकारी अस्पताल का एक बार फिर शर्मनाक करतूत सामने आई है। सरकारी अस्पताल में पहुंचे बर्जुग को अस्पताल ने एड़मिट कर लिया जिसके बाद कैसंर पीडि़त मरीज को बिना ब्लड चढ़ाए ही जबस्दती रात को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। जिसके बाद पीडि़त ने एक निजी अस्पताल में जाकर अपना ईलाज कराया।

जानकारी के अनुसार 80 साल का बुर्जग तेजपाल कैसंर की बीमारी से पीडि़त है। डाक्टरो की हिदायत अनुसार उसे समय समय पर खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। शनिवार शाम को तेजपाल अपने बेटे के साथ गुरूग्राम के सैक्टर 10 स्थित सरकारी अस्पताल में पहुंचा। अस्पताल के डाक्टरो ने उसके बेटे को ब्लड लाने के लिए कहा जिसके बाद उनका बेटा रोटरी ब्लड़ बैक से अपने पिता के लिए ब्लड़ लेकर पहुचंा और  डयूटी पर मौजूद डा0 महीपाल को अपने पिता को ब्लड़ चढ़ाने के लिए कहा लेकिन डाक्टर ने ब्लड़ चढ़ाने की बजाय उसे वहां से डिस्चार्ज कर भगा दिया। जिसके बाद पीडि़त ने नीजि अस्पताल में अपना ईलाज कराया
पैसे मागंने का लगा आरोप
मरीज तेजपाल के बेटे का आरोप है कि उससे ब्लड़ चढ़ाने के नाम पर पैसे की मांग की गई जब उन्होने इस बारे मेंं मना किया तो डा0 महीपाल ने उन्हे जबरदस्ती डिस्चार्ज कर दिया। बेटे का आरोप है कि डाक्टर ने उनके साथ  बदसलूकी करते हुए धमकाया।
पत्रकार के साथ की गई बदसलूकी
कवरेज करने से रोका गया

जब मरीज के परिजनो ने इस मामले को मीडिया के सामने उठाया तो वहां पहुंचे एक पत्रकार को सवालो का जवाब देने की बजाय डा0 महीपाल ने अस्पताल से बाहर जाने को कहा और धक्का दे की कोशिश भी की।
सिविल सर्जन की जाचं की बात
इस बारे में गुरूग्राम के सिविल सर्जन डा0 बीके राजौरा का कहना है कि मामला उनके सज्ञांन मेंं आया है। वे अपने स्तर पर इसकी जाचं कराऐगें। गुरूग्राम स्वस्थ विभाग मरीजो को किसी तरह परेशानी नही होने देगा। डा0 राजौरा का कहना है कि जाचं में जो भी दोषी पाया जाऐगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जाऐगी। उन्होने कहा कि यदि किसी मरीज को ईलाज के दौरान परेशानी होती है तो उनके कार्यलय में आकर उनसे मिल सकता है।

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