कभी वो दौर भी था जब फिल्मो का हथियार बनाकर भीड़ को रोका जाता था

कभी वो दौर भी था जब फिल्मो का हथियार बनाकर भीड़ को रोका जाता था
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ये बात उस दौर की है जब रैली के माध्यम से राजनेता अपनी बात कहा करते थे और रैली भी ऐतिहासिक हुआ करती थी सन 1977 में टीवी पर फिल्म को दिखाकर जनता को रोकने का प्रयास किया गया 

ये था पूरा मामला 
1970 में राज कपूर की फिल्म रिलीज़ हुई थी ‘मेरा नाम जोकर’. इसमें राज कपूर ने अपनी सारी संपत्ति लगा दी थी और कर्ज भी लिया था. फिल्म फ्लॉप हो गई और राज कपूर बर्बादी की कगार पर आ गए. फिर उन्होंने एक छोटे डिस्ट्रीब्यूटर चुन्नीभाई कपाड़िया की बेटी डिंपल कपाड़िया और अपने बेटे ऋषि कपूर के साथ एक फिल्म बनाई ‘बॉबी’. ये 1973 में रिलीज़ हो गई और अपने कॉन्टेंट की वजह से हिट हो गई.

ये वो दौर था, जब फिल्में आम जनता तक बेहद मुश्किल से पहुंच पाती थीं. ये टीवी पर ब्लॉकबस्टर फिल्में दिखाने का ज़माना नहीं था. पर 1977 के चुनाव से पहले ये फिल्म इतवार के एक रोज़ टीवी पर दिखाई गई. असल में बात ये थी कि 1977 के चुनाव से पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में इंदिरा की विपक्षी पार्टियों के नेताओं की एक बड़ी जनसभा होनी थी. ये रैली अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण के लिए भी याद रखी जाती है, जिसमें जगजीवन राम की वजह से भारी भीड़ आई थी.

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पर इस रैली में लोगों को पहुंचने से रोकने के लिए संजय गांधी के करीबी और सूचना-प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने रैली वाले दिन ही टीवी पर ‘बॉबी’ दिखाने का फैसला किया. और फिल्म का समय रैली वाला ही समय रखा गया  उन्हें उम्मीद थी कि लोग फिल्म देखने के लिए घर पर रुके रहेंगे. पर शुक्ला गलत साबित हुए. रैली में भारी तादाद में लोग पहुंचे और बारिश होने के बावजूद वो छाता लेकर देर रात तक डटे रहे. 

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