भाजपा नेता सतीश खोला ने की अहीर कॉलेज रेवाड़ी की वित्तीय जांच की मांग, घोटाले का आरोप

भाजपा नेता सतीश खोला ने की अहीर कॉलेज रेवाड़ी की वित्तीय जांच की मांग,  घोटाले का आरोप
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राज्यपाल को लिखा पत्र, कहा-कॉलेज को मिलने वाली  95% सरकारी ग्रांट बंद कर सरकारी करण किया जाए  

रेवाड़ी 

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भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे सतीश खोला ने अहीर कॉलेज रेवाड़ी  के प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने हरियाणा के राज्यपाल व कुलाधिपति को पत्र लिखकर बड़े वित्तीय घोटाले की सम्भावना के आरोप लगाते हुए पूरी जांच की मांग की है। साथ ही आग्रह किया है कि इस कॉलेज को मिलने वाली 95% सरकारी ग्रांट बंद कर इसका सरकारी करण किया जाए। 

भाजपा नेता ने अहीर कॉलेज के बारे में स्थापना से लेकर अभी तक के सभी तथ्यों की जानकारी के लिए RTI का सहारा लेने की भी कोशिश की लेकिन RTI कानून 2005 की धारा 8 (I) क्लॉज़ (जे) के तहत उन्हें कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया गया। खोला ने राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा है कि उनके पत्र दिनांक 12.8.2017, दिनांक 29.8.2017, दिनांक 1.8.2017, दिनांक 19.12.2016, दिनांक 21.4.2017, के तहत अहीर कॉलेज रेवाड़ी की संचालन संस्था के बारे मे RTI कानून के तहत जानकारी मांगी थी पत्र कर्मांक CB-II/RTI/04/2017/5805 दिनांक 15.5.2017 व पत्र कर्मांक 2/108-2017 RTI(2) दिनांक 4.09.2017 के तहत अहीर कॉलेज को जानकारी देनी थी लेकिन पत्र क्रमांक 17/AR/1861-62 दिनांक 6.10.2017 व पत्र कर्मांक 17/AR/1819 दिनांक 29.8.2017 के तहत प्रिन्सिपल अहीर कॉलेज रेवाड़ी ने RTI कानून 2005 की धारा 8 (I) क्लॉज़ (जे) के तहत जानकारी देने से मना कर दिया। 

खोला के अनुसार यह धारा केवल तभी लागु होती है जब किसी जानकारी से देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा हो। उनके अनुसार (धारा 8 (जे) के अनुसार सूचना जो व्यक्तिगत से संबन्धित है, जिसका प्रकटन किसी लोक क्रियाकलाप या हित से संबंध नही रखता है या जिससे व्यक्ति की एकांतता पर अनावश्यक अतिक्रमण होगा, जब तक की यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी या अपील प्राधिकारी का यह समाधान नही हो जाता है कि ऐसी सूचना का प्रकटन विस्तृत लोक हित मे न्यायोचित है।)

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खोला ने कहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ साथ उपरोक्त संस्था को सरकार से 95% मिल रही सरकारी ग्रांट की जानकारी व लेखा जोखा RTI कानून के तहत प्राप्त करना मेरा अधिकार है | उपरोक्त विषय पर धारा 8 (जे) का कोई संबंध नही है |

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि अहीरवाल के बुजुर्गो, बुद्धिजीवियों व उपरोक्त विषय के जानकारों के अनुसार अहीर कॉलेज सन 1944 मे अहीर एजूकेशन बोर्ड द्वारा स्थापित किया गया इसकी जमीन रेवाड़ी के वैश्य समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति ने जुबली अहीर हाई स्कूल के लिए पट्टे पर दान मे दी जोकि आज तक कायम है।  सन 1945 मे अहीर कॉलेज को लाहौर यूनिवर्सिटी से मान्यता मिली तब राव मोहर सिंह बोर्ड के अध्यक्ष बने। अहीरवाल के हजारों परिवारों ने कॉलेज की स्थापना के लिए लाखों रुपए चंदे के रूप में दिये और लगभग 1100 लोग अहीर एजूकेशन बोर्ड के आजीवन सदस्य बने।  सन 1954-55 में  तख्त सिंह गार्ड बोर्ड के अध्यक्ष बने। सन 1956-57 मे राव मोहर सिंह पुनः बोर्ड के अध्यक्ष बने और मेजर भगवान सिंह उपाध्यक्ष बने।  24 नवम्बर 1957 को राव मोहर सिंह कि अकस्मात मृत्यु के पश्चात उपाध्यक्ष मेजर भगवान सिंह बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए गए | सन 1960 में सुल्तान सिंह कोसली बोर्ड के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 

खोला के अनुसार सन 1972 मे अहीर कॉलेज को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से व 1977 मे महर्षि दयानन्द यूनिवर्सिटी रोहतक से अहीर एजूकेशन बोर्ड द्वारा मान्यता ली गई। सन 1980 मे नियमों व रिकॉर्ड मे छेड़ छाड़ करते हुए अहीर एजूकेशन बोर्ड भंग कर दिया गया तथा अहीर एजूकेशन सोसाइटी बनाई गयी जो की पूरे तरीके से गैर कानूनी बताई जाती  है।  जनता की मेहनत की दान राशि, आजीवन सदस्यो की राशि व अन्य दानदाताओं से आयी हुई राशि भी जब्त कर ली गयी और अहीर एजूकेशन सोसाइटी, अहीर कॉलेज का संचालन करने लगी और अहीरवाल की जनता ठग ली गयी।  उक्त सोसाइटी का संविधान भी मन मर्ज़ी तरीके से बनाया गया ताकि एक ही परिवार का कब्जा स्थापित रह सके। 

खोला ने आरोप लगाया कि तब से अहीर एजूकेशन सोसाइटी अहीर कॉलेज को चलाती है। आजीवन सदस्यों, दानदाताओं व अन्य सहयोगियों को सोसाइटी से बेदखल कर दिया गया। किसी सरकारी एजेंसी से जांच कराने पर निश्चित ही बड़ा वित्तीय घोटाला निकलेगा। 

अहीर एजूकेशन सोसाइटी के संस्थापक सदस्यों व अन्य सदस्यों,का अहीर एजूकेशन बोर्ड से कोई वास्ता नहीं है। सन 1977 मे कॉलेज संचालक के रूप मे महर्षि दयानन्द यूनिवर्सिटी रोहतक से अहीर एजूकेशन बोर्ड को मान्यता मिली हुई थी तो बोर्ड भंग करने व अहीर एजूकेशन सोसाइटी को कॉलेज संचालक के रूप में  यूनिवर्सिटी से मान्यता कैसे मिली ? अहीरवाल की जनता मे अभी तक यह बड़ा सवाल बना हुआ है। 

 सतीश खोला ने अनुरोध किया है कि  उपरोक्त विषय की उच्चस्तरीय कमेटी से जांच करवा कर अहीर कॉलेज को प्राप्त 95% सरकारी ग्रांट बंद कर राजकीय अहीर कॉलेज बना कर मुख्य संस्थापक सदस्यों, आजीवन सदस्यों व वास्तविक दानदाताओं  तथा अहीरवाल की जनता को न्याय दिलवाएं।

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