गुरुग्राम में हुआ एशिया का सबसे बड़ा फर्टिलिटी अधिवेशन

गुरुग्राम में हुआ एशिया का सबसे बड़ा फर्टिलिटी अधिवेशन
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'भविष्य में आईवीएफ और आईसीएसआई के परिणाम और होंगे बेहतर'

गुरूग्राम। नेशनल सोसायटी फॉर असिस्टिड रिप्रोडक्शन के हरियाणा चैप्टर का 22वां राष्ट्रीय कांफ्रेंस 21 अप्रैल से 23 अप्रैल तक गुरुग्राम स्थित हयात रिजेंसी में किया जा रहा है। कांफ्रेंस का उद्घाटन शुक्रवार को हरियाणा के स्वास्थ्य व खेल मंत्री अनिल विज ने किया। इंफर्टिलिटी पर आयोजित इस कांफ्रेंस में विश्वभर के करीब 2000 डॉक्टर भाग ले रहे हैं। इंफर्टिलिटी की समस्या पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की यह सबसे बड़ी कांफ्रेंस है। 

कान्फ्रेंस में अमेरिका से आए डॉक्टर डॉ. कृटॉस कोटिफेरिस ने बताया कि भारतीय महिलाओं में पश्चिमी महिलाओं के मुकाबले पांच वर्ष पूर्व ही महामारी बंद हो जाती है। इसका मुख्य कारण भारतीय खानपान है। उन्होंने बताया कि भारतीय महिलाओं में विटामिन डी और प्रोटीन की कमी आम बात है। डॉक्टरों ने कहा कि आईवीएफ और आईसीएसआई से अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

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वहीं अमेरिका से आई महिला चिकित्सक फैडीशारारा ने अपने संबोधन में आईवीएफ से संबंधित उच्च क्वालिटी की मेडिसन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कांफ्रेंस के दौरान वॉक निकालकर भी आमजन को इस संबंध में जागरूक किया गया।

इस कांफ्रेंस में पीएनडीटी और सेरोगेसी से जुड़े नियमों पर भी चर्चा की गई। कांफ्रेंस में ऑस्ट्रेलिया, यूके, मिडिल ईस्ट, बांगलादेश व पडोसी देशों से रिप्रोडक्शन तकनीक में महारथ हांसिल कर चुके कई दिग्गज विशेषज्ञों ने वर्कशॉप के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। कांफ्रेंस में ख्यातिप्राप्त डाक्टरों डा. बी.एन. चक्रवृत्ति, डा. साधना देसाई, डा. फिरोज पारिख, डा. कामिनी राव, डा. मनीष बैंकर, डा. धीरज गड़ा, डा. ऋषिकेश पाई, डा. जयदीप मल्होत्रा, डा. दुरूशाह, डा. रिषमा पाई व डा. नन्दिता पाल्शेत्कर इत्यादि ने भी भाग लिया। 

कांफ्रेंस के आयोजन की चेयरपर्सन डॉ. पूनम लूंबा, आयोजन सचिव डॉ. ज्योति गुप्ता, आयोजन सह सचिव डॉ. ज्योति मलिक ने बताया कि प्रधानमंत्री के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को विशेष रूप से इस अधिवेशन का प्रतीक चिह्न बनाया गया है।

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डॉ. पूनम लूंबा ने कहा कि वे आईवीएफ की ऐसी दवाइयां व उपकरण बनाएंगे, जो विकसित देशों में बहुत ही कम दामों में लोगों को उपलब्ध हो सकेंगी। डॉ. पूनम लूंबो ने बताया कि नि:संतान दंपतियों की संख्या एशिया के देशों में तेजी से बढ़ रही है। मोबाइल फोन और लैपटॉप के इस्तेमाल, टाइट कपड़े पहनना, एल्कोहल का सेवन और अत्याधुनिक तनाव से शुक्राणुओं की ही नहीं अंडाणुओं की संख्या भी कम हो रही है। यह भी बांझपन का एक बड़ा कारण देखने को मिल रहा है। मगर अब इसका इलाज भी संभव है। 

शुक्राणुओं को लैब में प्रिजर्व कर सालों तक रखा जा सकता है। वहीं अंडाणु और भ्रूण को भी लैब में प्रिजर्व कर रख सकते है। इन्ट्रा यूटरिन फर्टिलाइजेशन इन विट्रो फर्टिलाइजेशन इन्ट्रा साइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन से लेकर एग और स्पर्म डोनेशन, सरोगेसी पर देश विदेश के चिकित्सकों द्वारा मंथन किया गया। अधिवेश में आर्थिक रूप से कमजोर दंपत्ति के घर भी किलकारी गूंज सके, इसके लिए बांझपन के इलाज को सस्ते करने पर भी चर्चा की गई।

कान्फ्रेंस के बारे में जानकारी देते हुए इंडियन सोसायटी फॉर असिस्टिड रिप्रोडक्शन के  प्रेजिडेंट डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, सचिव डॉ. प्रकाश त्रिवेदी, चेयरपर्सन डॉ. मनिंदर आहुजा, मीडिया कोर्डिनेटर डॉ. आर के मेहता ने बताया कि इसार एक प्रतिष्ठित संस्थान है जिसका मुख्य उद्देश्य प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों को इंफर्टिलिटी के इलाज से संबंधित तकनीकों के बारे में शिक्षा प्रदान करना है। कान्फ्रेंस में डॉ. मनीषा मेहता, डॉ. ज्योति गुप्ता, डॉ. ज्योति मलिक, डॉ. नीरू बत्तरा के योगदान को एशिया की सबसे बड़ी इस कान्फ्रेंस में खूब सराहा गया।

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