मरने के बाद रखा वैलटीनेंटर पर

मरने के बाद रखा वैलटीनेंटर पर
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प्रवीण शर्मा
गुरूग्राम में नीजि अस्पतालों की मनमानी थमने का नाम नही ले रही है। शहर के दो नामी अस्पतालों पर आरोप लगा है कि  इलाज में लापरवाही के कारण मरीजों की मौत हो गई है। दूसरी और कोलम्बियां अस्पताल पर को परिजनों ने आरोप लगाया है कि एक महिला को  मरने के बाद भी वैलेटिनेटर पर रखा गया। इसके बाद भी अस्पताल की तरफ से लाखों रुपए का बिल भी बना दिया।

प्राइवेट अस्पतालों पर उठ रहे सवालों के बीच अब दो और अस्पतालों के खिलाफ भी शिकायत आई है कि उन्होनें इलाज में लापरवाही करते हुए मोटी रकम ऐठने का काम किया है। पारस अस्पताल पर आरोप लगा है कि एक युवक के इलाज में लापरवाही बरती गई जिससे उसकी मौत हो गई । वही कोलम्बियां एशिया अस्पताल पर तो आरोप ऐसे लगे है कि अस्पताल ने एक 67 वर्षिय महिला को मरने के बाद भी वैलेटिनेटर पर रखा। परिवार की तरफ बार बार अस्पताल पर दबाव बनाया तो अस्पताल ने जानकारी दी की महिला की मौत हो चुकी है। यही नहीं अस्पताल की तरफ से करीब 17 लाख रुपए का बिल भी परिवार वालों को थमा दिया।

परिजनो का कहना है कि दीपक के फेफड़ो में पानी भर गए था जिसके चलते उसे 19 फरवरी को पारस अस्पताल में एडमिट करवाया गया लेकिन डाक्टरो की लापरवाही की वजह से दीपक की मौत हो गई। अब परिवार वालो ने पुलिस को शिकायत दी हैं जिसपर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वही पारसअस्पताल प्रंबधन इस पूरे मामले पर कुछ भी बोलने को तैयार नही है
राजेंद्र ने शिकायत में कहा कि उनकी 67 वर्षीय माता सावित्री देवी के पित्ताशय में पथरी थी। दर्द होने पर 6 जनवरी को कोलंबिया एशिया अस्पताल ले जाया गया, जहां पर उनका ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद कहा गया, कि उनकी माता की आंत फट गई है। आंत जोडऩे के लिए एक ऑपरेशन किया जाएगा। 8 जनवरी को आंत का ऑपरेशन कर वेंटिलेटर पर रखा गया। उसके बाद दो ऑपरेशन और किए गए, लेकिन उनकी माता ठीक नहीं हुईं। 26 जनवरी को जब डॉक्टरों से मां से मिलाने को कहा गया, तो कहा कि वो मर चुकी हैं उनका शव ले जाओ। जिसके बाद पुलिस में शिकायत दी गइ। वही पुलिस दोनों ही मामलों में जांच कर रही है।

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गुरुग्राम में ये पहला मामला नहीं है इससे पहले भी मेदांता, मैक्स, आर्टिमिस और फोर्टिस जैसे अस्पतालों पर भी इस तरह के आरोप लग चुके है। जिसमें अभी भी जांच चल रही है। इलाज के नाम पर लूट करने वाले ये अस्पताल जांच की के दायरों में तो आते है लेकिन जांच की आंच इन्हे प्रभावित तक नहीं कर पाती। जिससे साफ है कि सरकार जांच तो कराने के आश्वासन देती है लेकिन इलाज के नाम पर लाखों रुपए वसूलने वाली ये दुकानें बैखौफ इस तरह की हरकत कर रही है। फिलहाल एक बार फिर एक एफआईआर औऱ जांच के लिए बनाई कमेटी जांच कर रही है। अब देखना ये होगा की ये जाचं कमेटी भी पहले की तरह केवल जाचं ही ना करती रह जाए।

 

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